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Wednesday, 15 October 2014

सम्मोहन ज्ञान त्राटक

    
सम्मोहन ज्ञान  

    (त्राटक के शुद्ध नियम विधि से सम्भव है।) 
          
     मित्रों, भाई और बहनों, जल्दी ही मैं पारस पत्थर निर्माण विधि इस साईट पर  देने जा रहा हू इंतजार करें। इस समय मुझे सम्मोहन विज्ञान की  प्रेक्टिकल व्यवस्था में कुछ व्यस्त होना पड़  रहा है। तमाम भाई और शुभचिंतकों की मांग पर हमने घर बैठे सम्मोहन, वशीकरण, कुंडलिनी जागरण स्वप्न विज्ञानं और त्राटक की बारिकियों को ग्रहण करने के लिए सहज कोर्स  दिया है। यह गर्व का विषय है कि, इस गोपनीय ज्ञान को जानने और ज्ञान ग्रहण करने हेतु भरी मात्रा में लोग उत्सुक एवं लालायित है। अतः आपका भी स्वागत है। 
                 
             सम्मोहन सीखना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है। यह तो मन का विज्ञान है जो सभी के अन्दर पहले से ही ईश्वर ने दे रखी है किन्तु ज्ञानाभाव के कारण  कोई अपने शक्ति का प्रयोग नहीं कर पाता। बल्कि इसमें पारंगत होकर दुनिया में अजीबो-गरीब कार्य सम्पन्न किए जा सकते हैं। बिमारियों के ईलाज से लेकर वशीकरण तक, असंभव से असंभव कार्य इसके जरिए आसानी से हो जाता है। यदि आप इसमें रूचि रखते हैं तो यह आपका सौभाग्य है। आप हमारे नंबर पर अपना विचार बता सकते हैं अथवा कोर्स आरम्भ कर जीवन को अद्भुत उपयोगी बना सकते है।   

          सम्मोहन अर्थात, किसी के मन को मोह लेने की क्रिया, न कि ...........तंत्र मंत्र में उलझना और भ्रमित करना। सम्मोहन मनुष्य के मन का विज्ञान है। दूसरे को सम्मोहित करना या उसके मन को अपने ढंग से संचालित करने की यह कला है। हम जो चाहें, जैसे चाहें, सामने वाला या दूर बैठा कोई भी हमारे विचारों को आत्मसंतुष्टि से पालन करे। सम्मोहन आज के युग में क्रांतिकारी विज्ञान है। वशीकरण सम्मोहन का ही रूप है। कुंडली जागरण अपने आप में गहन विषय है। परन्तु इसमें पारंगत होकर कोई भी व्यक्ति सम्मोहन के क्षेत्र  में मास्टर बन सकता है।

           क्योंकि मानव शरीर अनेक हड्डियों से निर्मित है। इन हड्डियों में कुंडलिनी चक्र है जो शक्ति का भण्डार है। सुषुम्ना, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध चक्र, आज्ञा चक्र और सहश्रार के नाम से प्रसिद्ध है। कोई भी व्यक्ति, पुरुष या स्त्री जब इन चक्रों पर अपना ध्यान एकाग्र करता है तब शरीर की गुरुत्वाकर्षण शक्ति कम होने लगती है। जैसे-जैसे ध्यान की एकाग्रता में वृद्धि होती है वैसे-वैसे सफलता भी स्पष्ट होने लगता है। क्योंकि ध्यान से एकाग्रता की प्राप्ति होती है और एकाग्रता से वायु पर नियंत्रण स्थापित होता है। तथा वायु नियंत्रण से व्यक्ति के अन्दर अद्दभुत चुम्बकीय तरंग की उपज होती है।

          शरीर की चुम्बकीय तरंगें ही व्यक्ति को अद्दभुत बनाती है। सम्पूर्ण शरीर स्वस्थ होकर अलौकिक सौंदर्य की प्राप्ति होना, शरीर से हर समय सुगंध प्रवाहित होते रहना, ज्ञान तत्व से ओत-प्रोत रहना, वाणी में मधुरता आना, स्मरण शक्ति का पावरफुल होना, सुनने और सुंघने में विलक्षणता आना, नेत्र व् अंगुली के पोरुओं में भारी मात्रा में हिप्नोटिक ऊर्जा एकत्रित होकर आपको त्रिकालदर्शी व्यक्ति बनाना। अतः सम्पूर्ण कुण्डलिनी चक्रों में से यदि कोई एक चक्र भी जागृत अवस्था में हो जाय तो समझिए साधारण आदमी भी सम्मोहन की अद्दभुत शक्ति प्राप्त कर ही लेता है। 

          परन्तु आज के युग माहौल वातावरण में इसका यूँ जागृत होना अति कठिन ही कहा जाएगा। इसलिए सम्मोहन वशीकरण की चुम्बकीय प्राप्ति के लिए इसके चुने हुए योग विधियों के सहारे आगे बढ़ना चाहिए। जैसाकि, मानव प्राणी में जन्म से ही सम्मोहन वशीकरण की ऊर्जा विराजमान रहती है। परन्तु अविकसित रूप में। यदि किसी के अन्दर विकसित भी होती है तो उसे उस शक्ति का प्रयोग करने का ज्ञान नहीं है। मनुष्य के अन्दर का हिप्नोटिक तरंग यानी सम्मोहन ऊर्जा ही वह हथियार है जिससे दुनिया में कुछ भी किया जा सकता है। किसी भी प्राणी या जीव-जंतु, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे को नेत्रों के प्रहार से इच्छानुसार  संचालित किया जा सकता है।

           इस विज्ञान में पारंगत होकर एक जगह बैठे बैठे भी विचारों और इच्छा के माध्यम से किसी को भी आदेश, निर्देश, सलाह, समाचार या सूचना दिया जा सकता है। व्यक्ति चाहें जितनी दूर हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। हम स्वप्न भी इसी सिद्धांत पर देखते हैं। क्योंकि एक सेकेण्ड में सैकड़ों उटपटांग दृश्य देखना यही सिद्ध करता है अर्थात कुछ तो हमारी दिन भर की सोंच स्वप्न के रूप में दिखता है। कुछ दूसरों की सोंच भी हमें स्वप्न के माध्यम से दिखता है। कारण कि, सोने के बाद सैकड़ों लोग आपके बारे में  विभिन्न तरीके से सोंच रहे होते हैं। उसी में आपका अपना विचार भी सामिल हुआ रहता है। अतः यह खिचड़ी प्रोग्राम होकर स्वप्न बन जाता है। 

          इस खिंचड़ी प्रोग्राम स्वप्न को आई-गई बात मानकर हम भूल जाते हैं। जबकि स्वप्न में आए एक-एक दृश्य का अर्थ होता है। यदि किसी एक दृश्य को पकड़कर उसकी भाषा समझे तो आप तुरंत परिणाम निकाल लेंगे। इस दृश्य का इस घटना से सम्बन्ध बनता है। अतः हम मुख्य विषय पर आते हैं। अर्थात सम्मोहन पावर को समझना और उसका सामाजिक स्तर पर लाभ उठाना, और जैसाकि इससे पूर्व मैंने एक लेख लिखा है कि, आँखों के सामने शून्य में एक काली तील इधर उधर भागती दिखाई देती है। इसे स्पष्ट आप कभी नहीं देख सकते। 

          यही काली तीळ शस्त्र है हमारे शरीर का। इस शस्त्र को धार देकर अचूक बनाया जाता है। अर्थात यौगिक क्रियाओं से शक्तिशाली बनाया जाता है तब यही काली तिल आपके लिए हथियार की तरह काम करती है। सामने जहाँ भी इस तिल को स्थिर करके जैसा भी सोंच बनाएगे और उस सोंच को जहाँ भी (किसी के मस्तिष्क में) प्रेषित करेंगे वहां पहुंचकर उस प्राणी पर पूरा प्रभाव डालती है। चाहें कोई दुश्मन हो, आलोचक हो, अच्छा हो, बुरा हो। वह आपके प्रति वैसी ही भावना रखेगा या सोंचेगा जो आपने हिप्नोटिक विचार भेजे है। और यह सौ प्रतिशत शरीर और मन का विज्ञान है। 

          आपने देखा होगा, संत फ़क़ीर लोग मोर पंख या हाथ के स्पर्श से बच्चे को झाड़ मारकर स्वस्थ कर दिया करते थे, आज भी देखने को मिलता है। यह क्रिया वैसी ही है जैसा हम बता चुके हैं। क्योंकि शरीर से हिप्नोटिक तरंग निकलने के दो मुख्य श्रोत है, पहला- नेत्र , दूसरा- हाथ की अँगुलियों के पोरुएँ। और उसे ग्रषित करने के लिए सम्पूर्ण शरीर श्रोत होता है। अतः नेत्र और अंगुली के पोरुओं की सम्मोहन उर्जा को सशक्त बनाने के लिए कुछ अभ्यास के साथ-साथ, व्यक्तित्व, व्यवहार, रहन सहन में बदलाव लाने पड़ते हैं। 
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Sunday, 27 July 2014

Turbo charged spinal column with 50,000 volts of rippling-Kundalini(state of consciousness)

Extract from Kundalini Tales "Not long after the first experience I contacted the Monroe Institute and participated in one of their weekend training sessions in Richmond, Virginia. I did not go out-of-the-body during the weekend, but back in Louisiana, the following week, I had the first and most powerful kundalini awakening of my life.

Early one morning, while doing the set of exercises I had learned the previous weekend, I moved precipitously into a staggeringly powerful state of consciousness. Because it was so much at variance with my normal frame of mind I am scarcely able to describe, even now, what it was like.


[caption id="" align="alignright" width="540" caption="mind state"]image[/caption]



My spinal column was turbo-charged with what felt like 50,000 volts of rippling, crackling electricity that came surging up my spine with an ear-splitting roar and arced out of the top of my skull and away into a vast, indescribable something that, for want of better words, resembled an enormously huge balloon hanging over my head.

It may be that the balloon-like impression represented my limited perception of an expanded state of super-consciousness that lay just above me. Meanwhile, my heart chakra was powerfully opened and I could see all around me without any physical impediment, right through the walls, in a 360º circle. I want to emphasize that I was seeing with startling clarity-- not with my physical eyes, which were closed, or with the so-called third eye in the forehead-- but with my heart. " kundalini tales by Richard Sauder
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Saturday, 26 July 2014

Cycle of Death and Rebirth(त्र्यम्बकं मंत्र)

This mantra is a prayer to Lord Shiva who is addressed as Sankara and Trayambaka. Sankara means giver of blessings: (sana = blessings, Kara = the Giver). Trayambaka is the three eyed one, where the third eye signifies the giver of knowledge, which destroys ignorance and releases us from the cycle of death and rebirth.


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Om Namastestu Bhagavan
Visvesaraya Mahadevaya
Trayambakaya Tripurantakaya
Trikagni - Kalaya
Kalagni - Rudraya Nil - Kanthaya Mrityunjaya
Sarvesvaraya Sadadhivaya
Sriman Mahadevaya Namah.
Meaning:
Om. I bow down to Lord Shiva, who is the creator and protector of the universe, who is the greatest among Gods, who has three eyes, who is the annihilator of all the three worlds, one whose throat is blue, who is the conqueror of death, who is the Lord of all, who is propitious who is possessed of all marks of greatness and who is the greatest among Gods. To him my prostration.
OM NAMAH SHIVA... HAR-HAR MAHADEV..!!
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Friday, 25 July 2014

energy that keeps taking on new shapes and forms

There is one energy that keeps taking on new shapes and forms


[caption id="" align="alignleft" width="355" caption="shiva parvati"]image[/caption]



. In Tantra the name of that energy is Shakti, which is the manifesting, or feminine force that is actually one and the same with its only apparent companion Shiva, the latent, or masculine. Each time the energy takes on a new form, we give it a new name. Shakti becomes Kundalini Shakti, or simply Kundalini. Kundalini becomes the energy of Prana, which flows in patterns or channels called Nadis, and concentrates itself by forming intersections known as Chakras. With Kundalini awakening, the primal energy of Shakti awakens in its true form. there is no shiva without shakti !
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फौजी-बलवान

आर्मी कोर्ट रूम में आज एक
केस अनोखा अड़ा था
छाती तान अफसरों के आगे
फौजी बलवान खड़ा था
बिन हुक्म बलवान तूने ये
कदम कैसे उठा लिया
किससे पूछ उस रात तू
दुश्मन की सीमा में जा लिया
बलवान बोला सर जी! ये बताओ
कि वो किस से पूछ के आये थे
सोये फौजियों के सिर काटने का
फरमान कोन से बाप से लाये थे
बलवान का जवाब में सवाल दागना
अफसरों को पसंद नही आया
और बीच वाले अफसर ने लिखने
के लिए जल्दी से पेन उठाया
एक बोला बलवान हमें ऊपर
जवाब देना है और तेरे काटे हुए
सिर का पूरा हिसाब देना है
तेरी इस करतूत ने हमारी नाक कटवा दी
अंतरास्ट्रीय बिरादरी में तूने थू थू करवा दी
बलवान खून का कड़वा घूंट पी के रह गया
आँख में आया आंसू भीतर को ही बह गया
बोला साहब जी! अगर कोई
आपकी माँ की इज्जत लूटता हो
आपकी बहन बेटी या पत्नी को
सरेआम मारता कूटता हो
तो आप पहले अपने बाप का
हुकमनामा लाओगे ?
या फिर अपने घर की लुटती
इज्जत खुद बचाओगे?
अफसर नीचे झाँकने लगा
एक ही जगह पर ताकने लगा
बलवान बोला साहब जी गाँव का
ग्वार हूँ बस इतना जानता हूँ
कौन कहाँ है देश का दुश्मन सरहद
पे खड़ा खड़ा पहचानता हूँ
सीधा सा आदमी हूँ साहब !
मै कोई आंधी नहीं हूँ
थप्पड़ खा गाल आगे कर दूँ
मै वो गांधी नहीं हूँ
अगर सरहद पे खड़े होकर गोली
न चलाने की मुनादी है
तो फिर साहब जी ! माफ़ करना
ये काहे की आजादी है
सुनों साहब जी ! सरहद पे
जब जब भी छिड़ी लडाई है
भारत माँ दुश्मन से नही आप
जैसों से हारती आई है
वोटों की राजनीति साहब जी
लोकतंत्र का मैल है
और भारतीय सेना इस राजनीति
की रखैल है
ये क्या हुकम देंगे हमें जो
खुद ही भिखारी हैं
किन्नर है सारे के सारे न कोई
नर है न नारी है
ज्यादा कुछ कहूँ तो साहब जी
दोनों हाथ जोड़ के माफ़ी है
दुश्मन का पेशाब निकालने को
तो हमारी आँख ही काफी है
और साहब जी एक बात बताओ
वर्तमान से थोडा सा पीछे जाओ
कारगिल में जब मैंने अपना पंजाब
वाला यार जसवंत खोया था
आप गवाह हो साहब जी उस वक्त
मै बिल्कुल भी नहीं रोया था
खुद उसके शरीर को उसके गाँव
जाकर मै उतार कर आया था
उसके दोनों बच्चों के सिर साहब जी
मै पुचकार कर आया था
पर उस दिन रोया मै जब उसकी
घरवाली होंसला छोड़ती दिखी
और लघु सचिवालय में वो चपरासी
के हाथ पांव जोड़ती दिखी
आग लग गयी साहब जी दिल
किया कि सबके छक्के छुड़ा दूँ
चपरासी और उस चरित्रहीन
अफसर को मै गोली से उड़ा दूँ
एक लाख की आस में भाभी
आज भी धक्के खाती है
दो मासूमो की चमड़ी धूप में
यूँही झुलसी जाती है
और साहब जी ! शहीद जोगिन्दर
को तो नहीं भूले होंगे आप
घर में जवान बहन थी जिसकी
और अँधा था जिसका बाप
अब बाप हर रोज लड़की को
कमरे में बंद करके आता है
और स्टेशन पर एक रूपये के
लिए जोर से चिल्लाता है
पता नही कितने जोगिन्दर जसवंत
यूँ अपनी जान गवांते हैं
और उनके परिजन मासूम बच्चे
यूँ दर दर की ठोकरें खाते हैं..
भरे गले से तीसरा अफसर बोला
बात को और ज्यादा न बढाओ
उस रात क्या- क्या हुआ था बस
यही अपनी सफाई में बताओ
भरी आँखों से हँसते हुए बलवान
बोलने लगा
उसका हर बोल सबके कलेजों
को छोलने लगा
साहब जी ! उस हमले की रात
हमने सन्देश भेजे लगातार सात
हर बार की तरह कोई जवाब नही आया
दो जवान मारे गए पर कोई हिसाब नही आया
चौंकी पे जमे जवान लगातार
गोलीबारी में मारे जा रहे थे
और हम दुश्मन से नहीं अपने
हेडक्वार्टर से हारे जा रहे थे
फिर दुश्मन के हाथ में कटार देख
मेरा सिर चकरा गया
गुरमेल का कटा हुआ सिर जब
दुश्मन के हाथ में आ गया
फेंक दिया ट्रांसमीटर मैंने और
कुछ भी सूझ नहीं आई थी
बिन आदेश के पहली मर्तबा सर !
मैंने बन्दूक उठाई थी
गुरमेल का सिर लिए दुश्मन
रेखा पार कर गया
पीछे पीछे मै भी अपने पांव
उसकी धरती पे धर गया
पर वापिस हार का मुँह देख के
न आया हूँ
वो एक काट कर ले गए थे
मै दो काटकर लाया हूँ
इस ब्यान का कोर्ट में न जाने
कैसा असर गया
पूरे ही कमरे में एक सन्नाटा
सा पसर गया
पूरे का पूरा माहौल बस एक ही
सवाल में खो रहा था
कि कोर्ट मार्शल फौजी का था
या पूरे देश का हो रहा था ?

आभार -- अज्ञात
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The more you sweat the more you shine

10552483_349025775246264_5312566837914353719_n. Yogis never prevent sweating. Sweating has a lot of benefits clearer skin, regulates body temperature and fights off sickness by eliminating toxins in the body.The reason manufacturers put aluminum in antiperspirants is to “dry out sweat by injecting aluminum ions in the cells that line the sweat ducts. This causes a reaction which closes the ducts” this reaction is unnatural. Be careful of marketing and what it can really do to your body. what are aluminium ions doing in your body ? The part of reality that is always unseen ! Your body is the temple of Shiva. treat it with love and respect. Visualizing love towards your body will help it bloom just like music helps flowers bloom. These are energies that impact all organic bio machines in a positive way !
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